April 21st, 2020

moj lik

Mои строфы на санскрите: miscellanea



Выкладываю поднакопившиеся новые санскритские строфы собственного сочинения:

मा गाच्छिष्य इमं विषादममितं यो देववाग्गाहितस्
त्वं स्नेहिन्सरितां भरोस्स्थित इतस्तारे* नु कस्तार आत् ।
दोषास्ते तरणा हि तावकतरे** साङ्गे तरङ्गे गिरां
मा भैषीश्च सरस्वती भगवती भूयाद्धि गोपी तव ॥

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