December 15th, 2020

moj lik

Герои нашего времени (II)



Вот такой памятник современным "героям повседневности" мы с родителями обнаружили в 2008 году в нижнеавстрийском городишке Цветтль. Это некая выдуманная "Анна С.", которая "стирает с помощью энергосберегающей экологической программы". Это было в те далёкие-предалёкие времена, когда в Европе ещё можно было свободно передвигаться, а вся последующая весёлая кафка ещё только намечалась нашими духовными воспитателями в Бильдерберге и Давосе.

Бронзовая надпись на табличке гласит: "Защитники климата — герои повседневности".

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moj lik

О мерзости так называемого "современного искусства": несколько мыслей, сформулированных на санскрите



आधुनिकायाः फिरङ्गकलायाः क्रूरत्वमिति सर्वेषां धीमतां नृणां स्पष्टतमम् । तस्मिन्विषये किं वक्तव्यं मयाऽश्रुपूर्णाकुलक्षणेनेति चेत् । कलायाः स्वभावः स्वरूपं वा सौन्दर्यमिति मतं मे सुनिश्चितम् । सौन्दर्यं श्रीरिति स्पष्टम् ॥ यया शक्त्योत्कृष्यत आत्मा नरस्य सर्वस्यामवस्थायां सा श्रीरिति स्मृतम् ॥ तस्मिन्न सति कुरूपत्वं विकृतभावतया विजयेताऽधुनिके कलिकाललोके ॥ तेन कुरूपत्वेन सर्वमिव व्याप्यतेतराम् ॥ आधुनिकैव धार्मा कला तथाऽस्ति ॥ यत्प्रसिद्धेनेदानीन्तनेन तत्त्वविदा Sir Roger Scruton-इति नामधेयेनोक्तं सुन्दरं कलाकार्यं दुःखसन्तापने समाश्वासं रत्यनुभवे त्ववधारणमावहतीति ॥ सौन्दर्ये तु न सति न शक्यते वै कुरूपत्वेन सन्तोषं रतिं वाऽऽनन्दं वाऽनुभवितुमिति न संशयो मम ॥ आधुनिका कला तु प्रायः विषादमेव भयं चाऽऽनयति ॥ तस्मात्तस्याः क्रूरत्वमित्युक्तमभूदादौ ॥ किं नु नबुना ॥